Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
निष्कलङ्कमनोमार्गविपुलाङ्गणचारिणी ।
तथा समस्तदुःखानां चिन्तानर्थविनाशिनी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मविचार एकमात्र निर्मल मनरूप मार्ग से प्राप्त होनेवाले निरतिशय भूमानन्दरूपी प्रांगण में विहार
करता है तथा उपस्थित अनेक दुःखों का एवं भावी दुःखों के संस्मरणं से जनित चिन्ता आदि अनर्थो
का विनाश कर देता है