Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
यद्बुद्धेः परमालोकमाद्यं यदमृतं परम् ।
यदनुत्तमसौभाग्यं तत्परं कारयेन्मनः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मर्षे, जो बुद्धि से परे हे, प्रकाशस्वरूप है, सबका आदि कारण है, निरतिशय
अमृतस्वरूप है तथा जिसकी अपेक्षा दूसरा उत्तम सौभाग्य (नित्य निरतिशय आनन्दरूप सौभाग्य)
नहीं है, उस परम तत्त्व में मन को स्थिर करना चाहिए