Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ये दुरर्था दुरारम्भा दुर्गुणा दुरुदाहृताः ।
दुष्क्रमास्ते न कृन्तन्ति चित्तं यस्य समाहितम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस महापुरुष का चित्त समाहित है, उसे उपार्जन करने
योग्य अनेक दुष्ट धनादि अर्थ; कृषि,गृह आदि दुष्ट आरंभ; राग, द्वेष आदि दुष्ट गुण; मर्मप्रकाशक दुष्ट
उक्तियाँ; दुष्ट नीतियाँ-ये सब अपने दुष्परिणाम द्वारा खेद नहीं पहुँचातीं