Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आधिव्याधिसमुत्थानि चलितानि महाभ्रमेः ।
न विलुम्पन्ति दुःखानि चित्तमेकं समाहितम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
शारीरिक एवं मानसिक पीडाओं से जनित तथा महान
विभ्रमो से (पुत्र, कलत्र आदि विषम-व्यामोहों से) विचलित हुए दुःख एकमात्र समाहित चित्त को ही
छिन्न-भिन्न नहीं कर पाते