Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अल्पकातीतकालेषु किंचिद्दूरेषु केषुचित् ।
तथाद्यतनसर्गेषु स्मरणे गणनैव का ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो स्वल्पतर भूतकाल में उत्पन्न हैं, जो कोई
कुछ दूर के हैं तथा जो आज के कल्प में उत्पन्न हैं, उनके विषय मेँ स्मरण की गणना ही क्या ? यानी
पूर्वोक्त सभी लोगों के विषय में विस्मरण हो ही नहीं सकता, यह भाव है