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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verses 30–31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verses 30–31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

राक्षसक्षतये विष्णोर्महीमवतरिष्यतः । अधुनैकादशं जन्म रामनाम्नो भविष्यति ॥ ३० ॥ नारसिंहेन वपुषा हिरण्यकशिपुं हरिः । जघान वारत्रितयं मृगेन्द्र इव वारणम् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, राक्षसो का विनाश करने के लिए पृथ्वी में अवतार ग्रहण करनेवाले महिमाशाली विष्णु का निकटवर्ती त्रेतायुग में ग्यारहवीं बार "राम" इस नाम से जन्म होगा