Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
द्वितीयमेतस्य समं भारतं नाम नामतः ।
स्मरामि प्राक्तनव्यासकृतं जगति विस्मृतम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, इसी ज्ञानशार्त्र के बराबर दूसरा ज्ञानशास्त्र था, जिसकी
"महाभारत" इस नाम से प्रसिद्धि थी एवं प्राकृतन व्यासजी के द्वारा रचना की गई थी ओर जो इस समय
जगत में विस्मृति को प्राप्त हो चुका है-मैं उसका स्मरण करता हूँ