Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
इतिहासं महाश्चर्यमन्यं रामायणामिधम् ।
ग्रन्थलक्षप्रमाणं च ज्ञानशास्त्रं स्मराम्यहम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज, मैं आश्चर्यजनक महती
घटनाओं से परिपूर्ण, प्रसिद्ध रामायण से भिन्न दूसरे रामायणनामक लक्षश्लोकात्मक ज्ञानशास्त्र का,
जो ब्रह्मदेव द्वारा वसिष्ठ, विश्वामित्र आदि को उपदिष्ट था, स्मरण करता हूँ