Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
शतं कलियुगानां च हरेर्बुद्धदशाशतम् ।
शौकराजतयैवाप्तं स्मरामि मुनिनायक ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिश्रेष्ठ, सौ कलियुग हुए ओर कीकटदेश के राजारूप से यानी महाराज
शुद्धोधन के पुत्ररूप से भगवान नारायण ने सौ बार बुद्धदशा प्राप्त की-इसका मुझे स्मरण है