Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अन्तर्धानं गता धात्री वारपञ्चकमुद्धृता ।
मुने पञ्चसु सर्गेषु कूर्मेणैव पयोनिधेः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
आचारो की समानता बतलाकर अब उनकी विषमता बतलाते हैं।
हे मुने, जल में डूबकर तिरोहित हुई पृथ्वी का समुद्र से भगवान कूर्म ने ही, न कि वराह ने, पाँच
सर्गो में पाँच बार उद्धार किया