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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

अत्यन्तान्तरितान्तान्तसमस्तापरमण्डलाम् । अजदेवत्रयीशेषां संस्मरामि जगत्कुटीम् ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

एक समय इस जगत- रूपी कुटिया में मेरु को छोडकर दूसरे सब देश समुद्र ने अंत तक आच्छादित कर दिये थे ओर उस समय इस मेरुपर्वत पर अविनाशी ब्रह्मा, विष्णु ओर शिव, ये देवत्रयी विराज रही थी - इसका भी मुझे ठीक स्मरण है