Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
महत्तर शिलावृक्षामजाततृणवीरुधम् ।
अशैलवनवृक्षौघां स्मरामीमां धरामधः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्ड ने कहा : हे श्रेष्ठतर,
इस पृथ्वी के विषय में मुझे स्मरण है कि एक समय इसमें शिला ओर वृक्ष कुछ नहीं थे; तृण, लता आदि
कुछ भी उत्पन्न नहीं हुए थे; पर्वत, अरण्य ओर भाँति-भाँति के वृक्ष कुछ भी नहीं थे तथा यह पृथ्वी मेरु
के नीचे स्थित थी