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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 41

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

अधिगतपरमात्मनोऽपि मन्ये भवदवलोकनशान्तदुष्कृतस्य । मम सफलमिहाद्य जन्म साधो सकलभयापहरो हि साधुसङ्गः ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

साधो, यद्यपि मेने परमात्मा को जान लिया है ओर आपके दर्शन से मेरे समस्त पाप नष्ट हो चुके, तथापि चूँकि महात्माओं का समागम भयो का अपहरण करनेवाला है इसलिए, यहाँ आज मेरा जन्म सफल (निरतिशय आनन्दरूप फल से युक्त) हुआ, ऐसा मैं मानता हूँ