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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

अद्य मे फलितं पुण्यैश्चिरकालोपसंभृतैः । निर्विघ्नमेव पश्यामि यद्भवन्तं मुने ततः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

अब, लम्बी कथा का उपक्रम करने पर पूजा में विलम्ब न हो जाय, इसलिए पहले पूजन-स्वीकार की प्रार्थना करने के लिए स्तुति द्वारा महर्षि को अभिमुख करते है। हे मुने, चकि दीर्घकाल से संचित किये गये मेरे पुण्य आज सफल हो गये, इसीलिए निर्विघ्नतापूर्वक आपका में दर्शन कर रहा हूँ