Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
परोपशमधर्मिण्या वयमालोकशीतया ।
पश्यन्तो जागतीं मायां धिया धैर्यमुपागताः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
धैर्य के कारण भी हमें खेद प्राप्त नहीं होता, यों कहते हैं।
निरतिशय शान्ति पहुँचानेवाली और आत्मप्रकाश से शीतल हुई बुद्धि से जगत की माया देख रहे
हम लोग धीरता को प्राप्त हुए हैं