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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

भुशुण्ड उवाच । निरालम्बास्पदा ब्रह्मन्सर्वलोकावहेलिता । तुच्छेयं सर्वभूतानां मध्ये विहगजीविका ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

कठिन समय आने पर जब बड़े-बड़े लोगों को भी क्षोभ हो सकता है, तव पक्षी जैसी अधम योनि में उत्पन्न हुए मेरी तो बात ही क्या ? तथापि विवेक की सामर्थ्य से खेद नहीं होता, यों कहने के लिए दूसरों के जीवन की अपेक्षा अपनी जाति के पक्षियों के जीवन की श्ुद्रता बतलाते है। भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन्‌, आकाश में आश्रित और सभी लोगों से तिरस्कृत यह पक्षियों का जीवन सब प्राणियों में अत्यन्त तुच्छ है