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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । ततः क्लिन्नेन्दुवदना पर्याकुलतमःपदा । क्षीयमाणा बभौ श्यामा विवेक इव वासना ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : तदनन्तर चन्द्ररूपी मुख से तथा व्याकुल अन्धकाररूपी पैरों से युक्त रात्रि उस प्रकार मरणोन्मुखी हुई, जिस प्रकार विवेक का उदय होने पर वासना मरणोन्मुखी हो जाती हे

सर्ग सन्दर्भ

पहला सर्ग समाप्त दूसरा सर्गं श्रीरामचन्द्र आदि के द्वारा महाराज वसिष्ठजी का सभा में आनयन तथा महर्षि द्वारा उक्त अर्थ के स्मरण से उनकी आत्मतत्व में विश्रान्ति-यह वर्णन ।