Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
मध्ये च काचखण्डानामिन्द्रनील इवोन्नतः ।
परिपूर्णमना मानी समः सर्वाङ्गसुन्दरः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह भुशुण्ड सभा में उस प्रकार
उन्नतरूप से स्थित था, जिस प्रकार काँच के टुकड़ों के बीच उन्नतरूप से इन्द्रनीलमणि स्थित हो । वह
आत्मज्ञान से परिपूर्ण मनवाला, मान्य, समदर्शी एवं सर्वाग सुन्दर था