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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

व्योम्नैव जातनष्टानां महतां व्योमपक्षिणाम् । बन्धूनाबद्धनिलयाञ्छरदभ्रसमाकृतीन् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश में ही उत्पन्न होकर वहीं पर नष्ट हो जानेवाले अर्थात्‌ मरणपर्यन्त भूमि पर न उतरनेवाले ओर अधिक बलवान होने से महान इसीलिए व्योमपक्षी नाम से प्रसिद्ध पक्षियों को-जो कि नित्य-क्रीड़ा में सहायक होने से बन्धु थे, अपने अपने घोंसले बनाकर स्थित थे एवं शरत्कालीन मेघो के समान शुभ्र आकृतिवाले थे (मैंने देखा)