Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
सितहरितपीतपाटलधवलैर्वनकुसुमराशिनवरङ्गैः ।
दिवि विहितामलचित्रं लीलाचलममरयुवतिवर्गस्य ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, (मैं इसका अधिक वर्णन क्या करूँ !) वह प्रतिदिन श्वेत, हरित, पीत, रक्त एवं
धवलवर्ण कानन के कुसुम-समूह रूपी नवीन रंगों से आकाश में मानों निर्दुष्ट चित्र खींचा करता था
और देवताओं का वह क्रीडापर्वत था