Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
शिलाविश्रान्तविबुधमिथुनाश्रितकन्दरम् ।
वराम्बराजिनं शुभ्रगङ्गायज्ञोपवीति च ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
अब उस शिखर की तापसरूप से उत्प्रक्षा करते हैं।
उसने सुन्दर आकाशरूपी मृगचर्म धारण किया था, शुभ्र गंगारूप यज्ञोपवीत से अलंकृत था और
वह बाँसरूपी दण्ड धारण करने के कारण पीले वर्ण के तपस्वी की नाई स्थित प्रतीत होता था