Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
उत्क्रान्तिं कुर्वतो मेरोर्ब्रह्मनाड्येव निर्गतम् ।
मूर्धानमागतं कान्तं वाडवं जठरानलम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
सुषुम्ना-नाड़ी से उत्क्रान्ति नामक योग-साधन के द्वारा ब्रह्मरन्ध्र
का भेदन कर निकलने की इच्छा कर रहे मेरुपर्वत के उदर से निकला हुआ शिए:प्रदेश में प्राप्त बडवाग्नि
के सदृश मानों जठराग्नि ही स्थित था