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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

कल्पान्तज्वलनोज्ज्वालापिण्डाद्रिमिव संचितम् । इन्द्रनीलशिखाधूममालोकारुणिताम्बरम् ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसकी शोभा प्रलयकालीन अग्नि की पिण्डीभूत ज्वालाओं के पर्वत-सी प्रतीत होती थी, शिखा के सदुश ऊपर को उठी हुई इन्द्रनील मणि की प्रभा ही उसका धुआँ था, उसके लाल प्रकाश से समस्त आकाश-मण्डल लालिमा प्राप्त किये था