Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स यथा जीवति खगस्तथेह यदि जीव्यते ।
तद्भवेज्जीवितं पुण्यं दीर्घं चोदयमेव च ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वह पक्षी (भुशुण्ड) जिस प्रकार दीर्घकाल
से जी रहा है, उस प्रकार यदि कोई प्राणी यहाँ अपना दीर्घजीवन व्यतीत करे, तो उसका वह दीर्घजीवन
साधनदशा में पुण्यमय और फलदशा में परमपुरुषार्थ रूप अभ्युदयसम्पन्न ही होगा