Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 127, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 127, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 127 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
कृते प्रपञ्चविलये यथा तत्त्वं प्रकाशते ।
तवोपायं प्रवक्ष्यामि संक्षेपाच्छ्रुतिशासनात् ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रश्न के अनुसार उत्तर कहने की प्रतिज्ञा करते हैं।
जब प्रपंच का लय किया जाता है तब जिस उपाय से परमतत्त्व प्रकाशित होता है उस उपाय को
तुम्हें संक्षेप से श्रुतिकथित क्रम का अवलम्बन कर कहता हूँ