Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 92
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, verse 92 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 92
संस्कृत श्लोक
स्मरणं विद्धि संकल्पं शिवमस्मरणं विदुः ।
तत्र प्रागनुभूतं च नानुभूतं च भाव्यते ॥ ९२ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्प ही सम्पूर्ण अनर्थो का मूल है, यह जो पहले कहा गया है, उसका भी यही अभिप्राय है, यह
इस आशय से कहते हैं।
हे श्रीरामजी, संकल्प को ही आप स्मरण समझिये ओर विस्मरण को तो विद्वान् लोग शिवस्वरूप
समझते ही हैं। संकल्प में पहले के अनुभूत पदार्थों की तथा अननुभूत पदार्थों की भी भावना की जाती
है