Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
असंसङ्गाभिधामन्यां तृतीयां योगभूमिकाम् ।
ततः पतत्यसौ कान्तः पुष्पशय्यामिवामलाम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह दूसरी भूमिका में पहुँचे हुए पुरुष का तीसरी भूमिका में प्रवेश बतलाते हैं।
इसके अनन्तर असंगनामक अन्य तीसरी योग्य भूमिका में वह पुरुष ऐसे प्रविष्ट होता है, जैसे
कान्त अपनी कान्ता की निर्मल पुष्पशय्या पर