Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रं सर्वमेवेदमित्थमाभासतां गतम् ।
नेह सत्यमसत्यं वा क्वचिदस्ति न किंचन ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह यथाभूत दर्शन कैसा है ? इस शंका पर कहते हैं।
श्रीरामजी, इस प्रकार प्रतीत होनेवाला यह सम्पूर्ण जगत केवल चिन्मात्रस्वरूप ही है, यहाँ सत्य
या असत्य कहीं कुछ भी पदार्थ नहीं है ओर न किसी का अस्तित्व ही है