Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मुमुहुर्न विमोहेषु न ममज्जुर्विपत्क्रमैः ।
न जहर्षुः शुभैः शोकै रुरुदुर्न भवानिव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
मोह के कारणभूत दुःखों के प्राप्त होने
पर न मोहित होते थे और न विपत्तियों के आक्रमणों से विचलित ही होते थ । श्रीरामजी, वे महात्मा
शुभों से अर्थात् अच्छे कार्यो से न प्रसन्न ही होते थे और न शोको से आपकी नाई रोते ही थे