Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 98
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 98 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 98
संस्कृत श्लोक
गतं पदार्थजातेषु चिदात्मानमुपास्महे ।
जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तेषु तुर्यातुर्यातिगे पदे ।। ९८
हिन्दी अर्थ
जाग्रत अवस्था, स्वप्नावस्था एवं सुषुप्ति अवस्था मेँ एकरूप से स्थित, तुरीय पद ओर उससे
भिन्न अन्य पदों का अतिक्रमण कर परमपद में अवस्थित, सभी स्थलों में सर्वदा समरूप से रहनेवाले
चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हे