Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 92
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 92 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 92
संस्कृत श्लोक
अगम्यो मललेखानां तच्चित्तत्त्वमहं महत् ।
सर्वसंकल्पफलदं सर्वतेजःप्रकाशकम् ।। ९२
हिन्दी अर्थ
जगत्स्वामी होने से जो संपूर्ण इच्छाओं का फल देनेवाला हे, अग्नि, सूर्य आदि तेजो का जो प्रकाशक है
और सभी ग्राह्य वस्तुओं के ग्रहण का प्रयोजनरूप होने के कारण जो संपूर्ण उपादेय पदार्थो की चरम
सीमा हे, ऐसे चिदाकार आत्मा की हम उपासना करते हैं