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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

मृतिब्रह्मत्वमायाते देहब्रह्मणि वै तथा । यथा चलाचले तोये त्वत्तामत्ते न तिष्ठतः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जडतारूपता के अपरित्याग से ही सब करमो मे ब्रह्मरूपता का ग्रहण न करें, इसलिए उसकी जडता का निषेध करते हैं। जिस प्रकार चंचल जलरूप में त्वत्ता और मत्ता नहीं रहतीं, उसी प्रकार परमात्मा में जड़तारूपता तथा प्रतियोगी के अप्रसिद्ध होने से तद्‌आवृत्तरूप अजड़ता भी नहीं रहती