Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तद्ब्रह्मणि ब्रह्मनिष्ठं किमन्यत्कस्यचित्कृतम् ।
रागादीनामवस्थानं कल्पितानां खवृक्षवत् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस परिपूर्ण ब्रह्म मेँ आकाश-वृक्ष की नाई, कल्पित राग आदि दोषों का अवस्थान-प्रसंग ही
जब नहीं हो सकता, जो असंकल्प से नष्ट हो जानेवाले हैं, तब उनका बढ़ना ही क्या ?