Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तथा पदार्थलक्ष्म्येत्थमिदं ब्रह्म विवर्धते ।
गृह्यते ब्रह्मणा ब्रह्म भुज्यते ब्रह्म ब्रह्मणा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त क्रिया, कारक और फ़ल ब्रह्मस्वरूप ही हैं, इस आशय से कहते हैं।
ब्रह्म से ब्रह्म का ही ग्रहण होता है, ब्रह्म के द्वारा ब्रह्म का ही उपभोग किया जाता हे, ब्रह्म मे ब्रह्म ही
विवर्तो से ब्रह्मशक्ति अर्थात् माया के द्वारा मानों बढता हे