Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
स्वरूपमस्याश्चैवैतत्कथितं प्रविचारितम् ।
असर्वं सर्वतो व्यापि सदिवासन्मयात्मकम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इस अज्ञानावृत चित्शक्ति का यह अत्यन्त विचारा गया स्वरूप, जो असत्यभूत
मायाविकार से तादात्मरूपता को प्राप्त होने पर भी सत् की तरह भासमान तथा असर्वात्मक होने पर
भी सर्वतः व्याप्त के सदृश प्रतीयमान है, मैंने आपको बतलाया हे