Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 84
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 84 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 84
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
भावाभावे पदार्थानां हर्षामर्षविकारदा ।
मलिना वासना यैषा सा सङ्ग इति कथ्यते ॥ ८४ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र, इष्ट एवं अनिष्ट पदार्थो की प्राप्ति तथा अप्राप्ति होने पर
हर्ष और विषादरूप विकार उत्पन्न करनेवाली मलिन जो यह रागादि वासना है, वही संग है, ऐसा
मुनि कहते हैं