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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 78

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 78 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 78

संस्कृत श्लोक

गतसङ्गमना जन्तुः पश्यन्नेव न पश्यति । न श्रृणोत्यपि श्रृण्वंश्च न स्पृशत्यपि च स्पृशन् ॥ ७८ ॥

हिन्दी अर्थ

विषयसंग से शून्य मनवाला प्राणी सुनता हुआ भी नहीं सुनता, स्पर्श करता हुआ भी स्पर्श नहीं करता । इस अर्थ की प्रतिपादक श्रुति भी है - “अन्यत्रमना अभूवं नादर्शमन्यत्रमना अभूवं नाश्रोषम्‌' (अन्यत्र मना था, अतएव मैंने नहीं देखा, अन्यत्रमना था, अतएव मैंने नहीं सुना)