Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 74
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 74 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 74
संस्कृत श्लोक
कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि ।
कर्म कुर्वन्नकुर्वन्वा निःसङ्गः सन्न लिप्यते ॥ ७४ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर, मन, बुद्धि तथा आसक्ति दोष से वर्जित इन्द्रियो से
व्युत्थानकाल में चाहे कर्म करे या समाधिकाल में चाहे न करे, ज्ञानी असंग होने के कारण कर्म या
अकर्म किसी से लिप्त नहीं होता