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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 68

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 68

संस्कृत श्लोक

संविन्मात्रं जगदिति मत्वा मुदितबुद्धयः । संविन्मयत्वादन्तस्थजगत्का विहरन्त्यमी ॥ ६८ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत्‌ चिन्मात्रस्वरूप है, यों जानकर ये प्रमुदितमति तथा समस्त जगत्‌ में आन्तर प्रत्यगात्मरूपता के अवलोकन से अन्तःस्थ जगत्‌-वाले महात्मा संविन्मय होकर सर्वत्र विहार करते हैं