Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
वहत्क्रकचकाषेण सितासिदलनेन च ।
शराशनिनिपातेन कम्पते न स्वरूपतः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन, इसलिए आप वर्णित हठादिरूप दुष्टबुद्धि का परित्याग कर शुद्ध संवित्ति का आश्रय
(परिज्ञान) कर रागशून्य होकर सुस्थिर हो जाइए