Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
कर्तर्यादिकरान्तेषु गम्भीरमुरजेषु च ।
ततावनद्धसुषिरचित्रवाद्यस्वनेषु च ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, यथाभूत अर्थ के यानी त्रिकाल में बाधित न होने वाले
अर्थ के साक्षात्कार से वासना अपने कार्य के लिए प्रवृत्त नहीं होती । आदि, मध्य और अन्त में कभी
भी पृथक् न होनेवाला सत्तामात्र स्वरूप जो पदार्थ सर्वत्र स्थित रहता है, वही सत्यभूत अर्थ हे,
उसको भलीर्भाति जान लेना ज्ञान कहलाता है । यही ज्ञान वासना का विनाश कर देता हे