Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
वसन्तमदमत्तानां षट्पदानां स्वनेषु च ।
प्रावृट्प्रसरपुष्पेषु जलदस्तनितेषु च ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
वासनाओं का भली प्रकार परित्याग करने से चित्त अचित्तरूप हो जाता है | ओर प्राणवृत्तियों का
परित्याग करने से भी चित्त अचित्तरूप हो जाता है, इसलिए आप जैसे चाहें वैसा कीजिए