Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवानुदितानन्दो न क्वचित्परिमज्जति ।
जीवन्मुक्तो गतासङ्गः सम्राडात्मेव तिष्ठति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
भद्र, जाते, श्रवण करते, स्पर्श करते, सूँघते, स्थित रहते, जागते, सोते सब अवस्थाओं मे उत्तम
मोक्षरूपी कल्याण के लिए इन तीन उपायों के अभ्यास में ही आप निरत हो जाइए