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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

गच्छतस्तिष्ठतो वापि जाग्रतः स्वपतोऽपि वा । न विचारमयं चेतो यस्यासौ मृत उच्यते ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

तब कौन ऐसा उपाय है, जिससे उनकी सिद्धि हो सके ? इस प्रश्न पर वैराग्यपूर्वक एक साथ तीनों का अभ्यास ही उनकी सिद्धि में उपाय है”, ऐसा उत्तर देते हैं । है राघव, विवेक से युक्त पौरुष प्रयत्न से भोग्च्छा का दूर से ही परित्याग कर इन तीनों का आश्रय करना चाहिए