Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 77
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 77 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 77
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे रघुद्रह, इसलिए आप भी शब्द आदि प्रिय-
अप्रिय विषयों के दर्शन से विमुख होकर जड़तारहित, एकरसस्वरूप तथा पूणनिन्दात्मक हो जाइए ।
जो असंवेद्य भी स्वतः प्रबुद्ध आत्मा है, तद्रूप ही आप हो जायेंगे, अन्यरूप नहीं हो जायेंगे