Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 73
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 73 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 73
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तब यथार्थ ज्ञान किस तरह का है, उसे कहते हैँ ।
हे श्रीरामजी, ये जो तीन लोक हैं, वे विशुद्ध संवित्-स्वरूप ही हैं, उससे पृथक् नहीं हे, इस
प्रकार का भीतरी जो दृढ़ ज्ञान है, वही यथार्थ ज्ञान है, ऐसा पण्डित लोग कहते हैं