Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
जन्मान्तरशताभ्यस्ता राम संसारसंस्थितिः ।
सा चिराभ्यासयोगेन विना न क्षीयते क्वचित् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब संवित् बाह्य विषयों में
उदासीन होकर आत्मबोध के लिए उद्युक्त होती है, तब प्राप्त करने योग्य वह निर्मल मोक्षरूप पद प्राप्त
हो जाता है