Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सममुद्योगमानीताः सन्त एते हि धीमता ।
संसाराब्धिं निकृन्तन्ति जलान्यद्रितटानिव ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार सूक्ष्म से सूक्ष्म-स्वरूपवाली गन्धलेखा वायु से बोधित होती है, वैसे ही सूक्ष्म से सूक्ष्मतर
आकारवाली सत्स्वरूपिणी सर्वगता संवित् प्राण प्रस्पन्दन से बोधित होती है