Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
शाखाप्रतानगहना फलपल्लवशालिनी ।
तेनेयं भवति स्फीता शरदीव वसुन्धरा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, इस अज्ञानी जीव में ही वासनारूपी अकुरों के समूहों से
दृढ़तापूर्वक प्रतिष्ठित हुआ विद्यमान मन ही दुःखरूपी वृक्ष का मूल हे, यह आप जानिए । दुःखरूप वृक्षों
के जंगल के अंकुर उसी मन से उत्पन्न होते हैं