Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यदा न स्पन्दते प्राणः शिरासरणिकोटरे ।
असंवित्तिवशात्तेन चित्तमन्तर्न जायते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप श्रीरामजी, मनस्ता (परमार्थरूपता की भ्रान्ति से घटादिदृश्य पदार्थो का मनन करना)
ही मूढता है, यह आप जानिए। जब उसका विनाश हो जाता है, तब चित्त विनाश नामक शुद्ध सत्स्वभावता
का भली प्रकार उदय होता है